Please reload

Recent Posts

सीमा प्रहरियों के स्नेह के आगे...हारा कोरोना, सिस्टर ऑफ़ बीएसऍफ़ हर साल की तरह इस बार भी पहुंची बॉर्डर पर

August 3, 2020

1/10
Please reload

Featured Posts

मिसाइल से लैस सुखोई पर भारतीय वैज्ञानिकों का बड़ा कारनामा

December 21, 2017

रूस ने मांगे 1300 करोड़, हमने 11 करोड़ में  कर दिया परीक्षण, वैश्विक वैज्ञानिक बिरादरी चौंक गई

 वॉ.ऑ.भा. बेंगलूरू-

रूस ने जिस काम के लिए हमारी सरकार से 1300 करोड़ मांगे थे। उसे हमारे वैज्ञानिकों ने 120 गुना कम लागत से मात्र 11 करोड़ में ही अंजाम दे दिया। लड़ाकू विमान सुखाई-30 एमकेआई से सुपरसोनिक क्रुज मिसाइल ब्रह्मोस दागने का सफल परीक्षण का श्रेय नेशनल एयरोनॉटिक्स लेबोरेटरीज (एन.ए.एल.) को जाता है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सी.एस.आई.आर.) की बेंगलूरू स्थित इस प्रयोगशाला ने वर्ष 2013-14 के दौरान सुखाई में ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से पहले बेहद निर्णायक विंड टनल टेस्ट श्रंखला को पूरा करने के लिए रूस ने केंद्र सरकार से 1300 करोड़ रूपये मांगे थे। उपर से वे तकनीकी हस्तांतरण के लिए भी तैयार नहीं थें।

भारत पहला देश

भारत विश्व का पहला ऐसा देश है, जिसने एक युद्धक विमान में क्रूज मिसाइल का इंटीग्रेशन किया है। तब भारतीय टीम जिसमें ब्रह्मोस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और भारतीय वायुसेना के सदस्य थे।

बम गिराने का पहला अनुभव

एन.ए.एल. के लिए भी अपने टनल में सुखोई युद्धक जैसे एक बडे़ विमान से ड्रॉप टेस्ट (बम इत्यादी गिराने) का यह पहला अनुभव था। एन.ए.एल. के 1.5 मीटर लो स्पीड विंड टनल में मैक 0.3 की न्युनतम गति पर भी इस परीक्षण को पूरा किया।

 

रूसी वैज्ञानिक भी चौंक गये

22 नवबंर को कलाइकुंडा वायुसेना केन्द्र से सुखोई ने उड़ान भरी और ब्रह्मोस मिसाइल से लक्ष्य भेद कर लौटा। एन.ए.एल. के परीक्षण से मिले आंकड़े इतने सटीक निकले कि रूसी वैज्ञानिक भी चौंक गए।

परीक्षण से मिले सटीक आंकड़े

एन.ए.एल. में परीक्षण से ब्रह्मोस दागने के समय विमान की उड़ान गति और विमान के विचलन कोण को समायोजित करने के लिए अहम आंकड़े मिले। इस दौरान विमान के सामने और पिछले हिस्से का कोणीय झुकाव कितना हो इस बारे में भी सटीक आंकड़े मिल गए। एन.ए.एल. ने लो स्पीड और हाई स्पीड विंड टनल टेस्ट के लिए सुखोई और ब्रह्मोस मिसाइल के उचित मॉडल का उपयोग किया।

 

पहली बार इतना जटिल परीक्षण

भारत में बार ऐसा हुआ जब एन.ए.एल. के एक्सपेरिमेंटल एयरोडायनेमिक्स डिविजन में बेहद जटिल ड्रॉप टेस्ट का परीक्षण किया गया। इस परीक्षण के दौरान विंड टनल में मिसाइल को विमान से दागा जाता है और इस दौरान विमान की उंचाई, गति, साइल दागने के कोण, उसका पथ आदि का विश्लेषण कर उसका निर्धारण होता है। सुखोई में ब्रह्मोस के इंटीग्रेशन से पहले ब्रह्मोस सेपरेशन ट्रायल की मंजूरी आवश्यक था जो इस परीक्षण के बाद मिल गया।

Share on Facebook
Share on Twitter
Please reload

Follow Us

I'm busy working on my blog posts. Watch this space!

Please reload

Search By Tags
Please reload

Archive
  • Facebook Basic Square
  • Twitter Basic Square
  • Google+ Basic Square
ABOUT US

वॉइस ऑफ़ भारत, हमारी कोशिश है आपको भारत की वो तस्वीर दिखाने की, जिसे अनगिनत, अंजाने नागरिक उम्मीद के रंगों से संवार रहे हैं. 

ADDRESS

56, Gayatri Nagar, Palroad, JODHPUR-342008 Bharat

SUBSCRIBE FOR EMAILS
  • Grey Facebook Icon
  • Grey Google+ Icon
  • Grey Instagram Icon

© 2019-20 Voice of Bharat