• दिलीप परमानन्द केसानी

सरहद पार जीवन

(भारत में अगर किसी धर्म की बात भी कर दी जाए तो कयामत सी आ गिरती है लेकिन सरहद के उस पार ऐसा नहीं है। जहॉ हिन्दू होना शायद सब से बड़ा गुनाह है: सामाजिक कार्यकर्त्ता पार्वती जांगिड़ सुथार से दिलीप परमानंद केसानी से हुई बातचीत पर आधारित लेख)

रेतीले टीले के पीछे से झांकता हुआ सूरज या टूटी-फूटी पुरानी झोपडी के शिखर पर बेठे मोर का तसवुर हो या फिर पुरानी बद-हाल बाजार से गुजरती पुरानी सी सड़क और पुराना खटारा सी गाड़ियां...... जैसा कि अक्सर बॉलीवुड की फिल्मों में बताया जाता रहा है. या फिर उसके बिल्कुल उल्टा बारूद के ढेर पे सांसें लेता मुल्क, जहा बच्चो के हाथो में किताबो की जगह बन्दूके होती है. क्या ऐसा है पाकिस्तान?

जी नहीं यह सब सिर्फ एक सोच के दायरे में बंधा हुआ सा ख्याल भर ही है. दरअसल अदब और तहज़ीब के हिसाब से भारत-पकिस्तान में ज़्यादा कोई बड़ा फ़र्क नहीं है. आखिर है तो वो भी हमारा हिस्सा ही न.. जो 1947 में हम से अलग हो गया था. ना उसके शहरो कि बनावट हमारे शहरों से अलग है न ही वहाँ तहजीब-रवायत हम से जुदा है. वैसे अगर कुछ अलग है तो सिर्फ वहाँ के हुक्मरानों और कुछ कटरपंथी लोगो की सोच, जो पाकिस्तान को दहशतगर्दी का अड्डा बनाए हुए है. न वहाँ मकान खंडर है और न ही शहर हम से जुदा है. हाँ अगर वहाँ कोई चीज खंडर और बद-हाल है तो वहाँ के थार इलाके में सेंकड़ो साल पुरानी हिन्दू मंदिर.

पाकिस्तान... एक दुश्मन मुल्क, कैसी है वहाँ जिंदगियां, कैसा है वहाँ का माहौल, शायद यह बात मैं अच्छि तरह से बता सकता हुँ क्योंकि मेरा जन्म बॉर्डर के उस पार हुआ, मैंने अपनी 10वीं भी वहाँ से की, इस लिए सिंध और सिंधी संस्कृति से काफी हद तक वाकिफ हूँ .

भारत में अगर किसी धर्म की बात भी कर दी जाए तो कयामत सी आ गिरती है लेकिन सरहद के उस पार ऐसा नहीं है। जहॉ हिन्दू होना शायद सब से बड़ा गुनाह है। वहाँ की तकरीबन 19 करोड़ आदम-शुमारी (जनसँख्या) में से अभी भी अंदाजन 20 लाख हिन्दू है. 90 प्रतिषत के आस-पास हिन्दू सिर्फ सिंध सूबे में रहते है।

एक हिन्दू परिवार का वहाँ रह पाना काफी हद तक मुश्किलों से भरा है। इस मुस्लिम मुल्क में हिन्दू खानदान चैन से नहीं जी सकते. वहाँ हिन्दू किसी भी बड़ी पोस्ट पर नहीं पहुंच पाते और अगर गलती से कही पहुंच भी जाते है तो वहाँ का सिस्टम उन्हें टिकने नही देता... सरकारी पोस्ट तो पोस्ट बल्कि वहाँ गै़र-सरकारी इदारो में भी हिन्दुओ की अनदेखी होती आई है... चाहे फिर वो अनिल दिल्पत हो या दिनेश कनेरिया जो वहाँ की क्रिकेट टीम में शामिल होने में तो कामयाब हो गए लेकिन बेहतरीन खिलाड़ी होने के बावजूद ज्यादा दिन मुल्क के लिए क्रिकेट न खेल सके.

लव-जिहाद जिस का ज़िक्र कुछ दिन पहले हमारे मुल्क की सभी मीडिया इदारों में रहा लेकिन इसी लव-जिहाद के हर साल हज़ारों किस्से होते है पाकिस्तान में लेकिन फिर भी उनकी कोई चर्चा तक नही करता रिंकल कुमारी...... शायद यह नाम कुछ लोगो ने ज़रूर सुना होगा जिस के लव-जिहाद का किस्सा वहाँ की सुप्रीम कोर्ट तक पहूँचा और कुछ इंटरनेशनल मीडिया के दबाव के बाद जब वहाँ के कुछ कटरपंथी मुस्लिम्स को एहसास हुआ की वो केस हार जायेंगे तो उन्होंने रिंकल कुमारी को गायब कर दिया. जिसका पता आज तक वहाँ कोई नहीं लगा सका और न ही इस बात की वहाँ आज तक कोई सुनवाई हो पायी है.

आखिर होता क्या है लव-जिहाद??? हिन्दू लडकियो को कुछ पाकिस्तानी मुस्लिम कटरपंथी अपने प्यार के जाल में फसते है और फिर घर से भगा ले जाते है या फिर काफी मामलो में उनको उठाके ले जाते है और उनका धर्म बदलके उनको मुस्लिम बनाया जाता है. पाकिस्तानी कानून के मुताबिक जो एक बार मुस्लिम बन गया वो दोबारा अपना धर्म नही बदल सकता. रिंकल कुमारी का तो एक छोटा सा मिसाल दे रहा हूँ. बल्कि एसी हजारो मिसाले आपको वहाँ मिल जायेंगी. इस मामले में ज्यादा मालूमात हासिल करने के लिए आप इन्टरनेट पर लव-जिहाद इन पाकिस्तान लिख कर सर्च करके देख लीजये. आपको हज़ारों इसे केसेस मिल जायेंगे.

उस के अलावा एक और ऐसे केस ने सब की आँखों में हेरात भर दी. हुआ यू कि एक हिन्दू मज़दूर अपने खेत में काम कर रहा था, तो पड़ोस के गाँव का एक मुस्लिम उसे मज़दूरी की लालच देकर अपने साथ मोटर साइकिल पे बिठाके ले गया और कुछ दूर ले जाकर उसे मारना शुरू कर दिया और आख़िर में उसे मरा हुआ समझ कर उसे वही छोड़ के चला गया, कुछ देर बाद जब वहाँ से पुलिस गुज़री और पता चला कि उसकी साँसे चल रही थी तो उसे गाव के एक अस्पताल में भरती करवाया गया. वो बुढा उस लड़के को जानता था क्योंकि पास के गॉव का ही था वो लड़का, जब पुलिस उस लड़के को थाने लेकर आयी और पूछा की क्या दुश्मनी थी, क्यों मारा इसे तब उस लड़के ने जवाब दिया कि मस्जिद के मौलवी साहिब ने कहा था कि रमज़ान में अगर तुम एक काफ़र को मारोगे तो सवाब होगा.

देखिये यह है सोच और यह है हाल हिन्दुओ का पाकिस्तान में. रमज़ान में इस के अलावा दूसरे काफी सारे केसेस होते रहते है कि इफ़्तार से पहले बाहर बैठ के कुछ खाना या कोई खाने पीने की दुकान तक खोलना गुनाह है.

वहाँ के ज़्यादातर हिन्दू अब मुस्लिम धर्म कबूल कर रहे है, तो कुछ भारत में आकर सहारा ले रहे हैं, उसके अलावा वहाँ काम कर रही कुछ ईसाइयों की संस्थाए भी हिन्दुओ को पैसे, रोज़गार या शादी की लालच देकर ईसाई बना रही है.

वहाँ तकरीबन हर शहर में वहाँ की खुफिया एजेंसीयों का ठिकाने बने हुए है. और काफी सारे शहरो में टेररिस्ट कैम्प्स भी है। जो लोगो का ब्रेन वाश करके उनको दहशतगर्द बनाने का काम करती हैं.

मेरे बचपन में मेरे साथ भी एक ऐसा हादसा हो चुका है जब में 6-7 साल का था और घर के बाहर खेल रहा था तो एक आदमी मुझे अग़वा करके पास में एक मदरसे में ले गया और वहाँ के एक कमरे में मुझे बंद कर दिया, भला हो मोहल्ले के कुछ शरीफ मुस्लिम लड़को का जिन्होंने मेरी तलाश करके मुझे 4-5 घंटो बाद वहाँ से छुडवाया. जी हां कुछ कुछ मामलो में बच्चो को किडनैप करके चाइल्ड ट्रैफिकिंग के रस्ते भी दहशतगर्द बनाते हैं.

ऐसा ही एक और किस्सा मुझे अपने बचपन का याद आता है जब में अपने शहर में अपने कुछ मुस्लिम दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था तो वहाँ से गुज़र रहे एक मौलवी ने मेरे दोस्तों को कहा कि तुम लोग काफर के साथ क्यों खेलते हो.

यही नही बल्कि 1999 की कारगिल लड़ाई के दौरान मेरे कुछ मुस्लिम दोस्त मुझे ताना मारने वाले अंदाज में अक्सर कहते थे कि कल को अगर जंग हुई तो तुम लोगो को हमारी फौज मार देगी या भारत भगा देगी तो उसके बाद आप लोगो की ज़मीन जायदात लावारिस हो जाऐगी. तो ऐसे में क्युं न आप अपनी ज़मीन जायदाद आधी कीमत पर हमें दे दो.

स्कूल में भी हम को ज़बरदस्ती कुरान और इस्लामियात पढ़ाई जाती थी। वहाँ के कुछ मुस्लिम उस्दात हिन्दू बच्चो को काफर कहके पुकारते थे. और उनके लफ्जों में सिर्फ और सिर्फ इस्लाम ही सचा धर्म है और बाकी सब धर्म झूठे हैं. हिन्दू देवी देवताओं का खुलेआम मजाक बनाया जाता है वहाँ की साइंस सब्जेक्ट तक में ज्यादा-तर सिर्फ मुस्लिम साइंटिस्ट का जिक्र मिलेगा. मेरी यह बाते शायद काफी लोगो को बुरी लग सकती है लेकिन बद-नसीबी से यही हक़ीक़त है.

पाकिस्तान में इंडियन न्यूज चैनल्स पर पाबन्दी है. क्योंकि वहाँ की सरकार अपनी आवाम को वोही दिखाना चाहते है जो वो खु़द चाहते है.. वहाँ की सरकार और ख़ास कर फौज सिर्फ यही चाहती है कि वहाँ की आवाम को इंडिया के कश्मीर में जुल्म बताये जाए, तो फर्ज़ी वीडिओज़ या एक तरफा तस्वीरे और वीडिओज़ बनाके दिखाये जाते है. तो ऐसे में झूठी न्यूज स्टोरीज बनायीं जाती है.

जिस कश्मीर पे पाकिस्तान का कब्ज़ा कर रखा है वहाँ की चीफ मिनिस्टर को वो वहाँ का वज़़ीर-ए-आज़म यानी प्राइम मिनिस्टर कहते है और वो न तो वहाँ की मीडिया या फिर वहाँ के किसी आम आदमी तक को दाखिल नही होने दिया जाता और न ही बलोचिस्तान की न्यूज कवर करने की इजाज़त दी जाती है.

हिन्दू मंदिरों की हालत कुछ जगह अच्छे ज़रूर है लेकिन अगर आप सिंध सूबे के थार के नगरपारकर इलाके के तरफ का रुख करेंगे तो वहाँ आपको खंडरो में तब्दील हो चुके हज़ारों साल पुराने मंदिर देखने को मिल जाऐंगे. हिन्दूओ की हिंगलाज माता का मंदिर भी पाकिस्तान में ही है और उसके अलावा सिखों के बड़े तीर्थ स्थलो में से एक भी पाकिस्तान में ही है.

पाकिस्तान में अगर किसी हिन्दू के प्लाट पे कब्ज़ा करना है तो उसका अजीब सा नुस्खा बना रखा है उन्होंने. वो उस प्लाट के कोने में मस्जिद बना देते है और एक बार मस्जिद बन गयी तो उसे हटाना किसी के बस की बात नहीं होती.

अभी कुछ महीने पहले सिंध के शहर उमरकोट में एक झूठी अफवाह की वजह से हिन्दू मुस्लिम दंगा हो गया और काफी सारे हिन्दुओ को सरे-आम मार दिया गया. दरअसल हुआ यूं कि किसी ने शहर में झूठी खबर फैलाई कि किसी हिन्दू ने पैगम्बर साहब के खिलाफ दीवार पे नारे लिखे है.. फिर इस बात पे जो कत्ले-आम हुआ वो लफ़्ज़ों में बयां करना मुश्किल है.

अगर बात वहाँ की फिल्म इंडस्ट्री की करे तो उसे वहाँ लॉलीवुड के नाम से जाना जाता है. वहाँ हर साल एवरेज 80 से 100 फ़िल्मर्स के आस पास हर साल फ़िल्मर्स बनायीं जाती है लेकिन चल सिर्फ 2-4 ही पाती है.. लगभग वहाँ की कई सारी फ़िल्मर्स में बॉलीवुड का अक्स रहता है.. जैसे हमारे भारत में राजा हिंदुस्तानी फिल्म बनी थी उसी की कॉपी उन्होंने वहाँ राजा पाकिस्तानी नाम से बना दी. ऐसे हज़ारों मिसालें आप को वहाँ मिल जायेंगीं.

पायरेसी के लिहाज़ से भी पाकिस्तान काफी बदनाम है.. वहाँ हमारी फ़िल्मर्स की खुले-आम पायरेसी होती है. न सिर्फ फ़िल्मर्स लेकिन हमारी इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री को तो काफी हद तक ख़त्म करने में भी पाकिस्तान का हाथ ही रहा है. आज भी आप को हमारी तकरीबन सारी फ़िल्मस के गीत वहाँ की वेब-साइट्स पे मिल जायेंगे.

आप को यह जान कर कुछ हद तक हैरत होगी की पाकिस्तान पूरी तरह से बाहर से आने वाले फंड्स पे चलता है. हजारो गैर सरकारी संगठन वहाँ काम करती है जो पाकिस्तान के बाहर से फंड्स लाती है। जिन में से ज्यादातर पैसा टेररिस्ट एक्टिविटीज पर खर्च किया जाता है. लेकिन इस बेहाल हालात के बावजूद वहाँ की ऑफिसियल बजट का आधे से ज्यादा हिस्सा वहाँ की आर्मी के लिए होता है.

रोड और वहाँ के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़्यादातर चीन खर्च करता है. रोड के ज्यादातर या फिर यू कहे की तकरीबन सारे के सारे ठेके चीन की कम्पनीज को दिए जाते है.

प्रोडक्शन और इंडस्ट्री की हालत वहाँ ज्यादा बेहतर नहीं है. एक्सपोर्ट करने लायक कोई प्रोडक्शन वहाँ होता ही नही. तो यह बात बिलकुल ठीक है कि वहाँ सुई तक बनायी नही जाती.

अफगानिस्तान में काम कर रही तालिबान के अन्दर भी ज़्यादातर पाकिस्तान आर्मी के लोग ही शामिल रहते हैं. फिर उसी तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान अमेरिका से पैसो की भिख मांगता है.

वहाँ के काफी सारे शहर शाम के बाद सनाटे में तब्दील हो जाते है. घर की दीवारें और दरवाजे मजबूत रखने पड़ते है. यहाँ तक कि हम को भी हमारे घर से शाम 6 बजे के बाद निकलने की इजाज़त नहीं थी. क्योंकि वहाँ कानून नाम की कोई चीज़ है ही नहीं.


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