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August 3, 2020

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शुद्ध साहित्य व काव्य लेखन के पर्याय कवि दादू प्रजापति

July 11, 2018

जिन्होंने अभावों, भूख और गरीबी को अपने

ऊपर हावी होने नहीं दिया, लेखनी के माध्यम से समाज में अच्छे बदलाव की मिसाल कायम की। 
(कवि दादू प्रजापति जो कहते है गरिबी मेरी माँ है, अभाव मेरे पिता है, मजबूरी और विवशता मेरी दो बहने है लेकिन शुद्ध साहित्य व काव्य लेखन के अद्वित्य साहित्यकार है कवि दादू प्रजापति)

कवि दादू प्रजापति

जन्म 10 सितम्बर 1963 शिक्षा-प्राथमिक/छठवीं फेल कार्यक्षेत्र-मंदिरों में चित्रकारी, काष्ठकृतिकार, मूर्तिकार, रंगकर्मी, वास्तुकार, कथावाचन, लेखन उनकी एक पुस्तक-तरकश के तीर
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प्रतिकूल परिस्थितियों में पली प्रतिभा का नाम है कवि " दादू प्रजापति " एक ऐसा विरला, फक्कड़, मस्तमौला, विचित्र चित्त वृत्तियों में जीने वाला अजीबोगरीब व्यक्तित्व है, जिसने जिंदगी की हर जंग को बखूबी लड़ा है। ऐसा अविजित योद्धा जिसे किसी संज्ञा सर्वनाम की परिधि में बांधा नही जा सकता है।
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  टीवी पर रामायण देखी थी..महाभारत और चाणक्य भी देखा। गीता..पढ़ी..!! ये हिंदोस्तान देखा...इसकी संस्कृति देखी..!! सुना करते थे...और स्कूल में पढ़ा करते थे...महात्मा गांधी...विनोबा भावे...सूर्यकांत त्रिपाठी निराला...जयशंकर प्रसाद...प्रेमचंद..!! कबीर व दादू दयाल के दोहे पढ़े...अनूप जलोटा और अनुराधा पोड़वाल के भजन सुने...!! मालगुडी डेज...दादा-दादी की कहानी..विक्रम बेताल...आफिस-आफिस भी देखा...!! सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण भी देखा...!! कहानी...किस्से...गजलें...गीत...मुक्तक...सब सुने..!! किताबों में खूब पढ़ा कि सच बोलें..सच सुने...सच लिखे...पर केवल किताबों में ही रहा...!! पर आज यह मिथक झूठला गया...जब भारत के एक एतिहासिक प्रांत मध्यप्रदेश जहां एक छोटा सा गांव नीमच...और वहां साहित्य साधना में रत...दुनिया की चकाचौंध..प्रसिद्धि...शोहरत..से कोसों दूर...मौत और जिंदगी के बीच जूझते...एक कलाकार..मूर्तिकार....अंक ज्योतिष..काष्ठकृतिकार...रंगकर्मी...वास्तुकार.......कथावाचन...लेखक और कवि परम आदरणीय श्री कवि दादू प्रजापति जी। रामनगर कालोनी मनासा जिला नीमच में संघर्षरत कवि दादू प्रजापति जी ने हिंदोस्तान में वो रचा है....जो आज तक कोई रच नहीं पाया...!! उनके तरकश के तीर एक बार पढ़ ली जाए...तो रामायण..महाभारत...चाणक्य...की परिभाषा समझ में आ जाए...!! बेबाक लेखनी...सत्य और केवल सत्य...को सजाती इनकी कलम....आज अनमोल धरोहर है...!!

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ये शख्स किताबों में नहीं...महलों में नहीं...धन दौलत में नहीं...और ना ही किसी बड़े मंच पर...रहते हैं...!! एक साधारण से मकान में...मेहनत मजदूरी से गुजरते हुए अपनी लेखनी में रत... इस योद्धा ने मनासा के इस स्थान को आज किसी मंदिर से भी ज्यादा पवित्र बना दिया है...!! प्रतिकूल परिस्थितियों में पली प्रतिभा का नाम है कवि " दादू प्रजापति "

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क्षेत्र कोई से भी हो चाहे वो साहित्य,संगीत, हो या फिर काष्ठ कृतिकार, ज्योतिष्कार, मूर्तिकार, चित्रकार, कथाकार आदि अनेक विधाओं का रणक्षेत्रकार हैं जो कभी न थका है, न हारा है, न ही विपरीत परिस्थितियों से परास्त हुआ है। दादू ऐसा अद्भुत, विलक्षण प्राणी है जो घनघोर अंधकार में टिमटिमाते जुगनू की तरह विचरण कर रहा था आपने उसे साहित्याकाश की दिव्य दिप्तियों का दिवाकर बना दिया है। माँ शारदे के दर का ये चारण जिसे आपने अपनी समृद्ध कलम से निखारकर वैदिक ऋचाओं के समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया है। भौतिकता की इस चकाचोंध में यह दरिद्रता का दिवाकर अस्त न हो जाए। उनके परम मित्र..सखा आदरणीय गणेश जैन की प्रबल इच्छानुसार दादू की साहित्यिक सेवाओं पर प्राप्त प्रतिक्रियाओं, आशीर्वादों, दुआओं का एक संग्रह प्रकाशित किया जाएगा जो "दुआओं के दरख्त" के रूप में हमारे समक्ष चिरस्मरणीय रहे। यह दादू के प्रति हम सब के असीम स्नेह का ये अनूठा प्रतिसाद या प्रसाद होगा।
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शब्द रचना के ऐसे जादूगर जिनकी कल्पना शक्ति अद्भुत है...मां सरस्वती की असीम कृपा से जिन्होंने शब्द साधना में अपनी आधी से ज्यादा जिंदगी ईमानदारी से व्यतीत की है..!! भगवान भी सच्चे...और अच्छे लोगों की कड़ी परीक्षा लेते हैं...तभी कवि दादू जी जैसे लोग अभी भी एक स्वच्छ और समर्पित साहित्य के लिए एक छोटे से कस्बे मनासा में संघर्षरत है...!! मेहनत मजदूरी...साधना और समर्पण..कड़ी धूप में खून-पसीने से शब्दों का महल खड़ा करने वाले ऐसे सरस्वती पुत्र के स्वागत के लिए साक्षात मां सरस्वती इंतजार में है...!! जिस तरह से इनके शब्दों का जादू दिल की गहराई तक पहुंच जाता है..उसी तरह हर शब्द में धड़कन पैदा करने वाले श्री दादू जी का ये अनमोल योगदान साहित्य में एक मिसाल कायम करेगा। 
ऐसे साहित्य रत्न के चरणों में समर्पित होकर #India30Award स्वयं को गौरवांविंत महसूस कर रहा है। 
हार्दिक बधाई।
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इंडिया30 सीरीज के उन श्रेष्ठ 30 नायकों में आपको शामिल कर युवा संसद,भारत स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती हैं।

 

 

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