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नेतृत्व साधना से श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण- डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे

October 23, 2019

पांच दिवसीय नेतृत्व-साधना प्रशिक्षण का गाँधी दर्शन, नई दिल्ली में समापन, डेलीगेट्स ने नेतृत्व पर गहन विचार मंथन कर उसकी बारीकियां सीखी, अतिथियों  ने खादी अंगवस्त्र व प्रमाण-पत्र से सम्मानित कर प्रतिभागियों का किया बहुमान

नई दिल्ली:

रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेमोक्रेटिक लीडरशिप एवं संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, राजघाट, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 16 से 21 अक्टूबर, 2019 को नेतृत्व साधना-9वीं श्रृंखला की कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें राजनीति, समाज सेवा, उद्योग, शिक्षा, चिकित्सा, न्याय व्यवस्था, अभियांत्रिक, पत्रकारिता इत्यादि से जुड़े चयनित 16 राज्यो से 39 युवाओं ने नेतृत्व पर गहन विचार मंथन कर उसकी बारीकियां सिखी।

 24 सेशन में हुई कार्यशाला, प्रमुख विषयों पर हुआ मंथन के साथ मार्गदर्शन
भारतीय लोकतांत्रिक प्रणाली, भारत का संविधान, चुनावी प्रणाली और सुधार, चुनाव प्रबंधन तकनीक, सरकार की भूमिका, सुशासन, गैर सरकारी संगठन, नागरिक विकास , कानूनी सहायता के लिए मूलभूत सुविधाएँ- आर टी आई, पीआईएल, ऍफ़आईआर, एनसीआर इत्यादि,  अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, भाषण कला, प्रवक्ता कौशल, राजनीतिक नेताओं के साथ विमर्श, संगठन विज्ञान,  महान नेताओं के गुण, मॉडल लोकसभा, सोशल मीडिया प्रबंधन इत्यादि

देश के इन सुविख्यात विशेषज्ञों का रहा मार्गदर्शन
रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के फ्लैगशिप कार्यक्रम नेतृत्व साधना (आवासीय प्रशिक्षण शिविर) की नौवीं श्रृखंला का शुभारंभ संस्थान के महानिदेशक रविंद्र साठे एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने उद्धघाटन सत्र से किया। प्रतिभागियों का विशेष सत्र लेने आये संस्थान के संस्थापक सदस्य और उपाध्यक्ष डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा की युवा मन राष्ट्रनिर्माण की अनंत आकांक्षाओं से भरा हुआ है, उन्होंने युवाओं को लीडरशिप की बारीकियों के साथ नेतृत्व सादगी पर विचार रखे और कहा की ऐसी दिव्य नेतृत्व साधना से ही श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण होता है।

केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, सुधांशु त्रिवेदी, मीनाक्षी लेखी, नितिन गोखले, विक्रांत सिंह तोमर, दीपांकर ज्ञान श्री, प्रशांत पटेल, डॉ दिव्या गुप्ता, सिमी मिश्रा, डॉ भारती छिबर, स्वदेश सिंह, हर्षदीप मल्हौत्रा, मनीषा ताते, अजय झा, राजीव नायल, शक्ति बक्शी, रवि पोखरणा, सीमा सुरक्षा बल के उपमहानिरीक्षक रवि गाँधी सहित विशेषज्ञों का मार्गदर्शन रहा।

नेतृत्व साधना कार्यशाला का संचालन प्रबोधिनी के अम्बर स्वामी, मुरारी साहू, राजेश कुमार ने किया। 

राजस्थान से डेलीगेट पार्वती जांगिड़ सुथार ने कहा की यहाँ हमने चुनाव प्रबंधन, सरकार मे NGO की भूमिका, संविधान, सूचना का अधिकार, नक्सलवाद, व्यक्तित्व विकास, चुनाव सुधार, उत्कृष्ट सम्बोधन आदि विषयों पर देश के प्रतिष्ठित लोगों से सीखा। 
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राजनीति विकासोंन्मुखी होना चाहिए । मतलब जो जनप्रतिनिधि अपने कार्यकाल में सशक्त विकास कार्य करता है उसे अलग से राजनीति करने की आवश्यकता नहीं । कुछ लोगों ने राजनीति को मजाक बना कर रख दिया है जबकि राजनीति – नीति और विचारों का संघ है । वास्तव में समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण करना ही ‘राजनीति’ है ।
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अगर हम उच्च शिक्षा में पढ़ाई जाने वाली पाठ्य पुस्तकों के आधार पर राजनीति पर गौर करे तो पता चलेगा कि यूनान के एंथेस नगर में दो हजार वर्ष पूर्व विचारक सुकरात ने जो चिंतन शुरू किया वह प्लेटो, अरस्तू, मेकियावली से होता हुआ आज यहां पहुंचा । भारतीय दर्शन के अनुसार – महाभारत काल में राजनीति पर खूब चर्चा हुई । राजनीति विज्ञान को राजधर्म कहा गया । कौटिल्य ने राजनीति को दण्डनीति कहा और अर्थशास्त्र नाम से राजनीति पर एक महत्वपूर्ण रचना की । चीन में कन्फ्यूशियस ने राजनीति को गंभीरता से लिया । मध्ययुग में हाब्स, लॉक, रूसो, मान्टेस्क्यू, बोंदा आदि ने अपने-अपने ढंग से राजनीति को परिभाषित किया । लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, पंडित मदनमोहन मालवीय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डाॅ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे महापुरूषों ने सेवा और जनजागरणों को राजनीति के रूप में प्रतिष्ठित किया ।
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मेरा मानना है समाज के उपेक्षित वर्ग के लिए कुछ करना भी राजनीति है । प्रतिभावानों को अनुकूल वातावरण मिलें ताकि वे अपने लक्ष्य को हासिल कर सके।
और ऐसा दिव्य अनुकूल वातावरण हमें मिल रहा।

 नेतृत्व साधना कार्यशाला का संचालन प्रबोधिनी के अम्बर स्वामी, मुरारी साहू, राजेश कुमार ने किया। 

Video #RaviPokharna 

 

 

 

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