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सीमा प्रहरियों के स्नेह के आगे...हारा कोरोना, सिस्टर ऑफ़ बीएसऍफ़ हर साल की तरह इस बार भी पहुंची बॉर्डर पर

August 3, 2020

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भारत की बेटी पार्वती का हिमवीरों के साथ राखी पर्व, 12000 फिट से भी ज्यादा उंचाई पर तैनात जवानों के बांधे रक्षासूत्र, भारत चीन बॉर्डर की सात दिवसीय भारत रक्षा पर्व यात्रा का दिल्ली में ITBP चीफ को रक्षा सूत्र बंधन के साथ समापन

August 19, 2019

(सैंकड़ों किलोमीटर की यात्रा, दिल्ली में तैनात फौजी भाईयों के राखी बाँधने से शुरू, हिमालय की अति-दुर्गम पहाड़ियों, 12000+ फिट उंचाई पर तैनात हजारों फौजी भाईयों की सूनी कलाईयों पर राखी बाँध मनाया भारत रक्षा पर्व, फोर्स हैडक्वाटर में आई.टी.बी.पी चीफ एस.एस. देसवाल व अधिकारीयों के राखी बाँध यात्रा का समापन किया)

 माना/बद्रीनाथ/नई दिल्ली:

हम लोग कभी दीपावली मनाते हैं तो कभी होली। कभी ईद मनाते हैं तो कभी रक्षाबंधन। खुशियों के सात रंग सीधे आसमां से उतरते हैं धरती पर हमारे लिए!! पर कभी सोचा है कि हम क्यों महफूज हैं...कैसे सुरक्षित हैं..!! कौन है जो हमारा रक्षक है..!! जो ईद या दीवाली..या फिर रक्षाबंधन...हर दिन 24 घंटे उस बोर्डर पर तैनात जहां दूर-दूर तक इंसान देखने को नहीं मिलता.. बस केवल दुर्गम पहाड़ियां, तो कहीं सफेद बर्फ के पहाड़, ना नेटवर्क ना कुछ और। भूख हो या भले प्यास लगी हो...पर मां भारती की रक्षा में सीना ताने बस डटे रहना। बहुत कम लोग हैं जो इनका ख्याल कर पाते हैं...उस समय जब हिंदोस्तान में खुशियों के पर्व आते हैं..!!

आईए हम आपको बताते हैं हिंदोस्तान की उस बहना की कहानी जो पिछले कई सालों से घर परिवार छोड़ अपने बोर्ड पर तैनात अपने फौजी भाईयों और देश की सुरक्षा के लिए तैनात जिम्मेदार अधिकारियों को राखी बांधने जाती है, सात दिन तक बॉर्डर पर रहती है, हजारों फौजी भाईयों की सूनी कलाईयों पर राखी बाँध, रक्षाबंधन को भारत रक्षा पर्व के रूप में मनाती है। इसलिए सीमा सुरक्षा बल इन्हें सिस्टर ऑफ़  बी.एस.एफ. और भारत तिब्बत सीमा पुलिस सिस्टर ऑफ़ हिमवीर कहता है।

 इस बार 12 अगस्त को राखी पर्व की टिगरी कैंप,दिल्ली 22वीं बटालियन से शुरूआत, देहरादून सेक्टर होते हुए हिमालय की दुर्गम चोटियों 12000+ फिट उंचाई पर तैनात जवानों के साथ तक और फोर्स हैडक्वाटर में ITBP चीफ एस.एस. देसवाल व अधिकारीयों के राखी बाँध इस सात दिवसीय यात्रा का समापन किया।

इन सात दिनों में पार्वती ने ITBP देहरादून, ऋषिकेस, गौचर, कोठीयाल, जोशीमठ, औली, बद्रीनाथ, बी.एस.एफ डोईवाला और भारत के अंतिम गांव माणा सहित 12000+ फिट उंचाई पर तैनात जवानों सहित कई सीमा चैकियों, हिमालय पर गस्त करते जवानों, देहरादून फं्रटीयर व दिल्ली मुख्यालय पर तैनात हजारों फौजी भाईयों की सूनी कलाइयों पर राखी बाँधी।

पार्वती ने इस यात्रा का शुभारंभ दिल्ली स्थिति ITBP की 22वीं बटालियन के समस्त फौजी भाइयों के रक्षासूत्र बांध की। इस अवसर पर बटालियन के उप-सेनानी बलवान सिंह ने पार्वती को सम्मानित करते हुए कहा कि पार्वती अब न सिर्फ सिस्टर ऑफ BSF है, बल्कि साथ साथ सिस्टर ऑफ हिमवीर है, सिस्टर ऑफ सोल्जर है।

मैं इनकी हिम्मत को दाद देता हूं। राजस्थान, गुजरात का बॉर्डर तो ठीक है लेकिन अब यह हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों में भी अपने फौजी भाइयों के बहन की कमी महसूस नहीं होने दे रही, इसी जज्बे को देखते हुए आर्म्ड फोर्स हाई अलर्ट के बावजूद पार्वती को भारत तिब्बत चीन बॉर्डर (हिमालय) पर जाने की अनुमति दी। इस यात्रा के दौरान देहरादून ITBP डी.आई.जी. अपर्णा कुमार को उनकी साहसिक यात्रा उत्तरी ध्रुव फतह करने पर रक्षा सूत्र बांध बधाई दी। सैंकडों अधिकारीयों व हजारों जवानों को राखी बांधने के साथ हिमालय पर तैनात हिमवीरों की समस्याओं के बारे में भी जाना और मुख्यालय को अवगत कराया।

पार्वती ने कहा मैं केंद्र सरकार का विशेष ध्यान आकर्षित कराना चाहूंगी कि इस डिजिटल और इंटरनेट के उच्च दौर में हमारे हिमवीरों को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ रही हैं। हिमालय पर इंटरनेट तो दूर की बात लेकिन फौजी भाइयों को सरकारी सेटेलाइट फोन से अपने परिवार से बात करने को एक मिनट के 25 रूपये देने पड़ रहे, जो हमारे जवानों के साथ, नाइंसाफी है। पार्वती ने कहा और भी काफी समस्याएं आई, जो मैं राष्ट्र सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संबधित अधिकारी व मंत्री से विमर्श कर, इसे सोल्व कराने की पूरी कोसिश करूंगी।

फोर्स हैडक्वाटर में ITBP चीफ एस.एस. देसवाल व ITBP प्रवक्ता विवेक कुमार पाण्डेय ने ससम्मान आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर पार्वती ने कहा मैं बहुत गर्व महसूस कर रही हूं कि मेरे हिमवीरों को राखी बांधने का सौभाग्य मिला और आज ITBP चीफ एस.एस. देसवाल व ITBP प्रवक्ता विवेक कुमार पाण्डेय को राखी बांध इस दिव्य और साहसिक यात्रा का शुभ समापन कर रही हूं।

मैं ITBP के महानिदेशक व PRO का हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ कि मुझे उन्होंने फोर्सेज के हाई अलर्ट पर रहने के बावजूद मेरे स्नेह को देखते हुए अनुमति दी और ITBP चीफ सर ने ससम्मान आशीर्वाद दिया। ये गौरवान्वित पल मेरे जिन्दगी के अहम पल बन गये, इसे कभी नहीं भूलंगी।

मेरे फेलोशिप डायरेक्टर सर का विशेष आभार की जो सेशन पहले स्टार्ट होने वाला था वो मेरे रक्षाबंधन पर्व बॉर्डर पर जाने के कारन स्थगित कर, मेरे वापिस आने पर किया।

मैं मेरे सहयोगी फेलो #निवेदिता दीदीजी, #तितिक्षा दीदीजी , #बालासाहेब भैया जी, #विनय भैयाजी, #शिव भैयाजी का भी आभार प्रकट करती हूँ की मेरे इस अभियान के लिए आपने अपना समय भी त्याग किया। और नए सेशन के लिए मेरा इंतजार। मैं आप सब शुभचिंतकों का यह स्नेह, सहयोग, आशीर्वाद कभी नहीं भूलूंगी।

इसी तरह प्यार, सम्मान, आशीर्वाद बनाये रखियेगा, श्री हरी हमें शुद्धि दे, बुद्धि दे, मैं अपना सर्वस्व राष्ट्र निर्माण के लिए स्वाहा कर दूंगी।

14 अगस्त को जोधपुर में वीर दुर्गादास जयंति पर पूर्व महाराजा गजसिंह द्वितीय पार्वती को वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान से अंलकृत कर रहे थे जबकि पार्वती हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों पर हिमवीरों की सूनी कलाई पर राखी के रंग भर रही थी, उन्हें बहन की कमी खलने नहीं दी, राजस्थान का प्रतिष्ठित अवार्ड लेने की बजाय पार्वती दुर्गम बाॅडर पर फौजी भाइयों को राखी बांधने गई, पार्वती के इस कदम की जोधपुर महाराजा सहीत सबने सराहना की। पार्वती ने कहा वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान के साथ मेरा नाम जुड़ना हर बालिका का सम्मान हैं, मैं महाराजा साहेब व चयन समिति का आभार प्रकट करती हूं, और विश्वास दिलाती हूं इस सम्मान का और अधिक गौरव बढ़ाउंगी।

पार्वती ने कहा- ITBP के मेरे सभी वीर योद्धा हिमवीर भाइयों सहित हिमवीर चीफ डी.जी. सर, प्रवक्ता विवेक कुमार, डी.आई.जी. अपर्णा कुमार, कमांडेट अजय गुप्ता, कमांडेट विक्रांत, कमांडेट प्रवीण कुमार, असिस्टेंट कमांडेट रोहित कुमार, असिस्टेंट कमांडेट बलवानसिंह, डी.सी. दीपेन्दर सिंह, तेजवीर सिंह, कोच व ओलपिंयन नानकराम सहीत सभी अधिकारीयों का हार्दिक आभार प्रकट करती हूँ, कि भारत की एक बेटी को इतना बड़ा सम्मान दिया और वादा करती हूँ कि ITBP के ध्येय वाक्य शौर्य, दृढ़ता, कर्मनिष्ठा व बी.एस.एफ. के ध्येय वाक्य जीवन पर्यन्त कर्त्तव्य को मैं भी पूर्ण ईमानदारी के साथ निभाऊंगी, एक बहन का पूरा फर्ज निभाऊंगी। श्रेष्ठ राष्ट ªनिर्माण में अपनी आहुति दूंगी। इंटरनेशनल बॉर्डर को सिक्योर करने वाली सभी बलों को रिटायरमेंट के बाद पेंसन मिले और शहादत को सम्मान के साथ शहीद का दर्जा मिले, संविधान में शहीद की उचित व्याख्या हो जबकि अब तक ऐसा नहीं है, इस पर काम करती रहूंगी, उम्मीद है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में जल्द अच्छा होगा। पार्वती ने लोगों से आहवाहान किया कि हम सब एक श्रैष्ठ नागरिक का दायित्व निभाएं, देष की सुरक्षा करना केवल सुरक्षा बलों, सेना का ही काम नहीं है, हम सबका है, विषेष सीमांत क्षैत्र के लोगों का, अगर हमारे आस पास कोई अवांछनीय गतिविधि नजर आये, किसी पर देष विरोधी गतिविधि का शक हो तो उसकी सूचना तुरंत ITBP, बी.एस.एफ. पोस्ट को, या नजदीकी पुलिस थाने में देंना चाहीए।

अपने बाल विवाह को नाकाम कर समाज के लिए हुई समर्पित,

पढ़ाई के लिये संघर्ष किया, जोधपुर में सिविल सेवा की तैयारी के लिये 2013 में कोचिंग संस्थान गईं .. फिर उसी दौरान वहां से गुजरते हुए बस एक घटना की साक्षी बनीं, जब उन्होंने कुछ युवाओं को मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला को छेड़छाड़ करते हुए देखा, जहाँ आस पास के लोग उस एक अर्धनग्न महिला को देख रहे थे और हंस रहे थे, फिर पार्वती ने अपनी चुन्नी से उसके तन को ढका और उस घटना को विराम दिया, इससे उन्हें अपने भीतर की पार्वती से मिलने का अवसर मिला और उस घटना से उन्होंने अपने भीतर कुछ बदलाव महसूस किया, और बस कुछ करने की ठान ली, हम हर रोज ऐसी घटनाओं से रूबरू होते हैं पर कितने हैं जो ऐसी घटनाओं से कुछ भीतर तक टूट जाते हैं. कितने हैं जिनके दिल में दर्द उठता हो ये सब देखकर, बस वहीं भावना पार्वती को खास बनाती है,  उस मानसिक विक्षिप्त महिला का दर्द उन्होंने खुद महसूस किया और महिलाओं के लिये तथा इस देष के लिए कुछ करने को खुद को भारत माता के श्रीचरणों में समर्पित कर दिया।

यहीं से उनकी समाज सेवा की यात्रा प्रारंभ हुई, 2015 में उन्होंने फिर यूथ पार्लियामेंट संगठन की स्थापना की, बालिकाओं की शिक्षा के लिये बहुत सारे प्रयास किये, इतना ही नहीं समाज के लिये समर्पित पार्वती यहीं नहीं रुकीं बल्कि देश के लिये शहीद होने वालों के परिवार के सम्मान के लिये और सैनिकों के लिये “भारत श्री” सम्मान की पहल की

शहीद की वीरांगना के साथ माता-पिता के नाम के आगे  “भारत श्री” लगाने की परम्परा प्रारम्भ कर, शहीद परिवारों के सुख दुःख में साथ देना प्रारम्भ किया,  देशभक्ति होती तो बहुत लोगों के दिल में पर जो इस भावना को सही में सच करके दिखाए वो नाम है पार्वती का,  अपने इसी समर्पण भाव से किये गए कार्यो के लिये उन्हें बहुत सारे सम्मानों से नवाजा गया है, जिनमें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, राज्यपाल कल्याण सिंह, व्हाइट हाउस अमेरिका प्रसंशा पत्र, वीमेन प्राइड, बीएसएफ की ओर से सिस्टर ऑफ बीएसएफ सम्मान, भारत गौरव, विश्वकर्मा रत्न, जियो दिल से अवार्ड, चाणक्य अवार्ड, हाल ही वीर दुर्गादास जयंती पर वीर दुर्गादास राठौड़ सम्मान सहित कई सम्मान सम्मिलित हैं,

कई सालों से हर साल सात दिन बाॅर्डर पर जवानों को राखी बांधती आ रही हैं, पैरामिलिट्रि के लिए कार्य करना भी उनकी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, बीएसएफ के स्वर्ण जयंती समारोह 2017 में सम्मानित होने वाले बीएसएफ के 2 वरिष्ठ अधिकारीयों सहित पार्वती एकमात्र सिविल पर्सन थीं।

स्त्री और पुरुष में भेदभाव की सोच को नकारती हुई पार्वती ने हमेशा स्त्रियों के लिये सम्मान की बात कही, फालतू रिवाजों और बेड़ियों में बंधी महिलाओं को अपने अस्तित्व के बारे में जगाने में हमेशा प्रयासरत हैं पार्वती,

श्रेष्ठ राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आएं युवा

राष्ट्र निर्माण और विकाश के लिए युवाओं की भागीदारी आवश्यक है। वर्तमान समय में गलत राह चुनकर भटक रहे युवाओं को सही रास्ते पर लाना मेरा मकसद है, साथ ही भारत विश्व गुरु बने उसके लिए अधिक से अधिक युवा राष्ट्र कार्यों के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर, समाज व राष्ट्र कार्य करें। है। -पार्वती जांगिड़ सुथार, चेयरपर्सन- युवा संसद,भारत। ग्लोबल गुडविल एम्बेसडर।

 

 

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